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एक प्याली धूप (Ek pyali dhoop)

Hindi Poem माँ, शब्द नहीं वाक्य है खुद में। क्या कुछ नहीं करती, खुद खुदा के जैसी और बच्चों में ढूंढती है ख़ुदा। माँ, शब्द नहीं वाक्य है खुद में। In Hindi एक प्याली धूप परोसी है उसने सर्द हवाओं...

/ July 23, 2018

बड़ी दूर निकल आये

माँ तुम फिर से पुकारो न मुझे, बहुत डर लगता है जीने में अब भी। In Hindi पुराने पीपल पे खेलते चढ़ जाते थे हम माँ ज़ोर से आवाज़ दे बुलाती थी भूतों के डर से हम भी सहम जाते...

/ July 17, 2018