पतंग की डोर

पतंग की डोर से जुड़ा हूँ मैं तुमसे, कितना मुश्किल है दूर जाना। In Hindi वो पतंग की डोर जो मेरी आँखों से तुम्हारे जहन

वक़्त फुरसत है

तुमको कैसे बताऊँ कि तुम क्या हो मेरे लिए। In Hindi वक़्त से पिघले हुए लम्हें की तरह तुम मेरी रूह में भटकती हो वक़्त

छोटा था लम्बा सफर

ज़िन्दगी का लम्बा सफर तुम्हारे साथ इतना छोटा क्यों लगता है? In Hindi मेरे पाने तुम्हारे खोने में कहानी यूँ बयां होगी ये नहीं जानते

मेरे गुमनाम घर

तुम्हारी साँसों की महक से ज़िन्दगी बंधी है मेरी, अब घुटन तकलीफ़ देती है। In Hindi मेरे गुमनाम घर में मुझसा ही बसता है कोई