टूटते हिस्से

कल से बीमार खटिये पे पड़ी है माँ
छोटू भी बेचारा कल से भूखा है
जो पिछले महीने भेजे थे वो खर्च हो गए
राशन वाले ने भी पुराना उधार माँगा है
तो क्या सरकारी मदद अब तक नहीं आयी
आयी थी और आके सरपट चली गयी
लोग दौड़के उसको पकड़ते ही रह गए
हालात ने करवट नहीं बदला अभी तलक
आओ अब गृहस्थी संभलती नहीं मुझसे
कढ़ाई में पानी डाल कब तक मुन्ने को बहलाऊँ
निकलता हूँ अभी आके करता हूँ ठीक मैं
लग जायेंगे दस एक रोज़ के दूरी बड़ी है
वो आया तो नहीं पर खबर आ गयी
रस्ते में पैदल चलते उसे भगवान ले गए
अकेले नहीं मरा था गृहस्थी भी गयी थी
भूख से बिलबिलाता छोटू भी गया था
खटिये पे पड़ी माँ खटिये पे रह गयी
उस घर में बस लाजवत अकेले पड़ी थी
चेहरे पे गिले-शिकवों के धब्बे लगे थे
अकेले ही चला गया वो उसे ले नहीं गया

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5 Comments

  • Dyper Reply

    Great content! Keep up the good work!

  • Hold Porn Reply

    Be beautiful enough to feast the eyes

  • 三五笑话 Reply

    不知道说啥,开心快乐每一天吧!

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