Hindi Poetry/Quotes/Status

कितने बँट गए हैं हम, कभी ख़ुदा के नाम पे, कभी मज़हब के नाम पे, कभी संस्कृती के नाम पे, कभी खाने के नाम पे। जाने कौन बांटता है हमे पर कितने बँट गए हैं हम।

In Hindi

कभी ईसा, कभी मूसा तो कभी राम में बंटे
कभी गिरजे, कभी मंदिर कभी अज़ान में बंटे
वो कौन सी घड़ी थी शैतान के तस्दीक़ की
हम तो सभी इंसान थे क्यों शैतान में बंटे

In English

Kabhi isa, kabhi musa to kabhi ram mein bantein
Kabhi girje, kabhi mandir kabhi ajan mein bantein
Wo kaun si ghadi thi shaitan ke tasdik ki
Hum to sabhi insan the kyon shaitan mein bantein

Posted by Tejas

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