Month: July 2018

एहसास को जीने दो (ehsaas ko jeene do)

Hindi Poem तुम्हारे सारे गम और सारी ख़ुशियों का पिटारा हूँ मैं, साँस आती हो या जाती हो वो एहसास सिमट के गुनगुनाते हैं। In Hindi पर्त-दर-पर्त घुलने दो मेरी ख़ामोशी में ज़र्द खुशियों से जुटाई हुई सारी हसरत तुम्हारी...

/ July 30, 2018

रोज थोड़ा सा (Roz thoda sa)

Hindi Poetry/Quotes/Status रोज थोड़ा सा कितना जानती हो तुम मुझको, शायद मैं भी नहीं जानता। In Hindi क़िताबों की तरह पढ़ती रही तुम रोज़ थोड़ा सा मैंने भी तुम्हारी आँख में कुछ फ़लसफ़े जोड़े हर्फ़-दर-हर्फ़ कुछ नयी कहानी बनती बिगड़ती...

/ July 26, 2018

एक प्याली धूप (Ek pyali dhoop)

Hindi Poem माँ, शब्द नहीं वाक्य है खुद में। क्या कुछ नहीं करती, खुद खुदा के जैसी और बच्चों में ढूंढती है ख़ुदा। माँ, शब्द नहीं वाक्य है खुद में। In Hindi एक प्याली धूप परोसी है उसने सर्द हवाओं...

/ July 23, 2018

दरख़्त चुपचाप बैठे हैं

कितने किस्से समेटे बैठे हैं ये पेड़, डर में घुटते क्यों रहते हैं ये पेड़। In Hindi माथे पे नमकीन बरसात और गला सूखा पड़ा है ख़ौफ़ यूँ है के सारे दरख़्त चुपचाप बैठे हैं पेड़ उठते ही नहीं डालियों...

/ July 19, 2018

दुआ ये खुदा तक जायेगी

छोटे हाथों से बनता है वो कहानी अपनी। रोज़ देखता है वो आसमानों में, जाने कब उसकी दुआ ख़ुदा तक जाएगी। In Hindi सर्द हवा में सुलगता जिस्म नंगे पैर सड़कों पे दौड़ती साँसे छोटे हाथों को थपकी का इंतज़ार...

/ July 18, 2018

लैंप-पोस्ट

A Hindi short story of a lamp-post starts from a small city and ends with a question. ये मेरी कहानी है, एक लैंप–पोस्ट की कहानी। आज़ादी से पहले की बात है, यूपी का एक छोटा सा शहर जहाँ मेरा जन्म...

/ July 17, 2018